सविता भाभी की ऑफिस में गांड मारी

bhabhi sex stories, antarvasna chudai

मेरा नाम राकेश है में दिल्ली का रहने वाला हूं, मेरी उम्र 28 वर्ष है और मैं एक कंपनी में नौकरी करता हूं। मैं जिस कंपनी में नौकरी करता हूं वहां पर मैं मार्केटिंग मैनेजर हूं और मुझे इस कंपनी में काम करते हुए काफी समय हो चुका है लेकिन मैं अपने काम से बिलकुल भी खुश नहीं हूं। मुझे इस कंपनी में अच्छी सैलरी मिल रही है इसलिए मैं इस कंपनी में काम कर रहा हूं लेकिन मेरा मन अब जॉब करने का बिल्कुल भी नहीं है। मैं सोचने लगा कि मैं अपना ही कोई नया काम शुरू कर लू क्योंकि मैं काफी समय से मार्केटिंग का काम कर रहा हूं, जिससे कि मेरी अच्छी पहचान हो चुकी है इसलिए मैं सोचने लगा कि मुझे अपना ही कोई काम खोल लेना चाहिए। इस बारे में मैंने अपने माता-पिता और बड़े भैया से भी बात की, वह कहने लगे यदि तुम्हें लगता है कि तुम्हें अपना ही कोई काम शुरू कर लेना चाहिए तो तुम अपना काम शुरू कर लो क्योंकि उन्हें मुझ पर पूरा भरोसा है। मैं बचपन से ही जो चीज अपने दिमाग में ठान लेता हूं उसे मैं जरूर पूरा करता हूं, यह बात मेरे घर वालों को अच्छे से पता है।

मैं सोचने लगा कि मुझे अपनी कंपनी से रिजाइन दे ही देना चाहिए इसलिए मैंने अपनी कंपनी में रिजाइन लेटर दे दिया और कुछ समय बाद मैंने अपनी कंपनी छोड़ दी और अपने घर पर ही था। मेरे पास कोई भी काम नहीं था। मैं अपना काम खोलने के लिए सोच रहा था। मेरे पास कुछ सेविंग थी और  मैंने बैंक से लोन भी अप्लाई कर दिया था और मैं इस इंतजार में बैठा हुआ था कि जब मेरा लोन पास हो जाएगा उसके बाद मैं अपना काम शुरू कर  लूंगा लेकिन मेरा लोन पास नहीं हो पा रहा था और उसके बीच में मैं कई जगह अपने ऑफिस के सिलसिले में भी गया क्योंकि मुझे मेरे काम खोलने के लिए एक ऑफिस भी चाहिए था। मुझे एक लोकेशन बहुत पसंद आया और उस लोकेशन पर मैंने अपना ऑफिस खोल दिया, इस ऑफिस का ज्यादा किराया भी नहीं था इसलिए मैंने वह ऑफिस को खोल दिया। मैंने उसमें सारा काम करवा दिया और उस दौरान मेरा लोन भी पास हो चुका था। जब मेरा लोन पास हुआ तो मैंने अपना काम शुरू कर दिया।

मैंने अपने खुद के कुछ कॉस्मेटिक प्रोडक्ट बनाए और मेरे पहचान वाले जितने भी लोग थे वह सब मुझसे वह सामान खरीदने लगे क्योंकि मैं उन्हें बहुत ही कम दाम के कॉस्मेटिक का सामान प्रोवाइड करवा रहा था इसीलिए वह मुझसे ही खरीदते थे। अब मुझे लगने लगा कि मुझे किसी को अपने साथ काम पर रख लेना चाहिए क्योंकि मैं अकेले ज्यादा काम नहीं संभाल पा रहा था। मैंने इस बारे में अपने परिचित लोगों को भी बता दिया यदि आपकी नजर में कोई व्यक्ति मेरे साथ काम करने को इच्छुक हो तो वह काम कर सकता है। मैंने अपने घर में भी इस बारे में बता दिया था। मेरी मां कहने लगी कि हमारे पड़ोस में सविता रहती हैं, वह भी एक दिन मुझसे कह रही थी कि उसे भी कुछ काम करना है, तुम उससे बात कर लो, शायद वह तुम्हारे साथ काम कर ले क्योंकि वह बहुत ही मेहनती है और काम के प्रति बहुत ही ईमानदार है। मैं उन्हें इतना नहीं जानता था लेकिन मैं जब उनके घर गया तो मैं उनके साथ काफी देर बैठा हुआ था। उन्होंने मुझे उस दिन अपने पति से भी मिलवाया। मेरा परिचय उन लोगों से ज्यादा नहीं था क्योंकि मैं घर पर बहुत कम रहता था इस वजह से मैं उन्हें अच्छे से नहीं पहचानता था लेकिन उस दिन वह मेरे साथ काम करने के लिए तैयार हो गए और उनके पति भी कहने लगे की यदि सविता काम करेगी तो उसे भी बहुत अच्छा लगेगा, वैसे भी वह घर पर अकेली रहती है और घर पर बोर हो जाती है। अब सविता भाभी के पति को भी कोई आपत्ति नहीं थी और मैं भी बहुत खुश था। उसके बाद मैं अपने घर चला गया और मैंने अपनी मम्मी से कहा कि सविता काम करने के लिए तैयार हो चुकी है। मम्मी कहने लगी कि मैंने तुम्हें कहा था कि वह तुम्हारे साथ काम करने के लिए तैयार हो जाएगी क्योंकि वह बहुत ही इच्छुक थी, जब वह मुझसे मिलने आई तो उसी वक्त मुझे लग गया था कि वह जरूर तुम्हारे साथ काम कर लेगी। अब सविता भाभी ऑफिस का काम संभालती थी। वह सारे पैसे का लेनदेन का काम देखती थी। वह बहुत ही अच्छे से काम कर रही थी और कई बार वह मुझे ऑर्डर भी दिलवा देते क्योंकि उनकी भी पहचान बहुत अच्छी है।

वह जब भी मुझे कुछ आर्डर दिलवाती तो मैं उन्हें उसके बदले पैसे दे देता था। अब हम दोनों की भी आपस में बहुत बातें होती थी। मैंने उनसे पूछा कि आपकी शादी कब हुई, वह कहने लगी कि हमारी शादी को अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ है क्योंकि वह लोग इससे पहले यहां नही रहते थे,  वह कुछ समय पहले ही हमारे पड़ोस में शिफ्ट हुए इसलिए मैं उन्हें अच्छे से नहीं पहचानता था। सविता भाभी का नेचर बहुत ही अच्छा है और जब भी मुझे घर से आने में लेट हो जाती तो वह ऑफिस का सारा काम संभाल लेती थी इसलिए मैं ऑफिस के बारे में ज्यादा चिंतित नहीं था और अब मैं मार्केटिंग का काम करने लगा, मैं मार्केट से अब काफी ऑर्डर उठाने लगा। मेरा काम भी बहुत अच्छा चल रहा था। सविता भाभी बहुत खुश थी और वह कहती थी कि मुझे तुम्हारे साथ काम करने में बहुत अच्छा लगता है क्योंकि तुम जिस मेहनत से काम करते हो वह मुझे बहुत अच्छा लगता है। हम दोनों ही ज्यादातर घर से साथ में ही आते थे। हम शाम को एक साथ ही लौटते थे, यदि कभी मुझे लेट हो जाती तो मैं उन्हें कह देता कि आप घर चले जाइए मैं थोड़ा लेट से आऊंगा।

एक दिन मैं ऑफिस में ही था और उस दिन मुझे बहुत लेट हो गई। मैंने सविता भाभी से कहा कि आप घर चले जाइए लेकिन वह कहने लगी कि मैं यहीं पर रुक जाती हूं। मैंने सविता भाभी को बहुत कहा लेकिन वह कहने लगी कि मैं कुछ देर रूक जाती हूं और तुम्हारे साथ ही घर जाऊंगी। वह मेरे साथ बैठकर ही काम कर रही थी मेरा हाथ जैसे ही सविता भाभी के पैर पर पड़ा तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। वह अपने पैरों को खोल रही थी मैंने भी उनके होठों को किस कर लिया और बहुत अच्छे से उनके होठों को मैंने चूसा जिससे कि उनके अंदर की उत्तेजना बाहर आने लगी और मैंने अपने लंड को निकालते हुए सविता भाभी के मुंह में डाल दिया। वह मेरे लंड को बहुत अच्छे से चूस रही थी और उन्हें बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। उन्होंने काफी देर तक मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसा जिस से कि मेरा पानी भी बाहर आने लगा। मैंने उन्हें घोड़ी बना दिया जैसे ही मैंने अपने लंड को सविता भाभी की योनि में डाला तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होने लगा। धीरे-धीरे मेरा लंड उनकी योनि की गहराइयों में चला गया और मैं बड़ी तेजी से उन्हें झटके देने लगा। मैं सविता भाभी को इतनी तेज धक्के मारता की वह पूरी हिल जाती और मुझे कहती कि तुम तो बहुत अच्छे से चोद रहे हो। मैंने अपने लंड को सविता भाभी की गांड में डाल दिया जैसे ही मेरा लंड सविता भाभी की गांड में घुसा तो वह चिल्लाने लगी। वह कहने लगी तुमने यह क्या कर दिया मैंने उन्हें कहा कि मैंने अपना लंड आपकी गांड मे डाल दिया मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। उन्हें बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था इसलिए वह बहुत चिल्ला रही थी और मुझे कह रही थी कि अपने लंड को मेरी गांड से बाहर निकालो लेकिन मैंने उन्हें नहीं छोड़ा और मैं उन्हें बड़ी तेजी से धक्के देते रहा। थोड़े समय बाद उन्हें भी मजा आने लगा और वह भी अपनी गांड को मुझसे टकराने लगी और बड़ी तेजी से वह  अपनी गांड को मुझसे टकरा रही थी। जब वह अपन गांड को मुझसे टकरा रही थी तो मुझे बहुत अच्छा महसूस होता और उन्हें भी बहुत अच्छा लग रहा था। मैंने भी उनकी गांड को कसकर पकड़ा हुआ था और बड़ी तेजी से धक्के दे रहा था लेकिन मैं ज्यादा समय तक उनकी गर्मी को नहीं झेल पाया। जब मेरा वीर्य गिरने वाला था तो मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उनकी बड़ी-बड़ी चूतडो पर गिरा दिया। उन्हें बहुत अच्छा लगा जब मैंने अपने वीर्य को उनकी गांड पर गिरा दिया वह बहुत खुश थी। वह मुझे कहने लगी कि मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा है जब आपने मेरी गांड पर अपने माल को गिरा दिया।