पैसे भी दूंगी और चूत भी दूंगी

Hindi sex kahani, antarvasna मैं ट्रे में अपने मेहमानों के लिए चाय लेकर आई उस दिन हमारे घर पर कुछ मेहमान आए हुए थे। मैं अपने 10 साल पुराने फैसले के बारे में सोच कर बहुत ज्यादा दुखी थी और मुझे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था क्योंकि 10 वर्ष पहले मैंने जो फैसला लिया था उससे आज मुझे अपनी जिंदगी में भुगतना पड़ रहा है। मैंने सुधीर से शादी करने का फैसला किया हालांकि मेरे माता-पिता इस रिश्ते के लिए बिल्कुल भी मंजूर ना थे वह कहने लगे तुम एक ड्राइवर के बेटे से शादी करोगी लेकिन मैंने अपने माता पिता के फैसले के खिलाफ सुधीर के साथ शादी कर ली। यह मेरे जीवन का सबसे गलत फैसला था कि मैंने सुधीर से शादी की जब मेरी शादी सुधीर के साथ हो चुकी थी तो उसके कुछ वर्षों तक सब कुछ ठीक रहा। सुधीर और मेरे बीच में बहुत प्यार था सुधीर मुझे हर हफ्ते मूवी दिखाने के लिए लेकर जाया करते लेकिन धीरे-धीरे उनका प्यार कम होता गया और मेरे लिए उनके दिल में प्यार ही नहीं था।

 मैं इस फैसले से बहुत दुखी हो चुकी थी और आखिरकार मैंने अपनी जिंदगी से जैसे समझौता कर लिया था मेरे चेहरे पर अब वह पहले वाली मुस्कुराहट नहीं थी। मेरे माता-पिता को भी इस बात का अच्छे से आभास था कि मैं सुधीर के साथ अब खुश नहीं हूं लेकिन उनके पास भी शायद कोई रास्ता नही था क्योंकि मेरी गलती की सजा मुझे ही भुगतनी थी। हमारे घर पर जो रिश्तेदार आए हुए थे उनसे मैं बात कर रही थी लेकिन मेरा ध्यान कहीं और ही था मैं सोच रही थी कि मैंने सुधीर से कुछ दिन पहले अपने लिए एक लहंगा लेने की बात की थी लेकिन सुधीर ने तो जैसे मेरी तरफ देखना ही छोड़ दिया। सुधीर को मेरी खुशियों से कोई मतलब नहीं था वह अपने आप में ही इतने ज्यादा व्यस्त रहते कि उनके पास मेरे लिए समय ही नहीं होता यदि उनसे मैं बात करती तो वह हमेशा कहते कि मैं यह सब तुम्हारे लिए ही तो कर रहा हूं। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इसमें किसकी गलती है क्योंकि मैं भी अपनी जगह सही थी मैं सिर्फ सुधीर से अपने लिए कुछ समय चाहती थी लेकिन सुधीर के पास जैसे मेरे लिए समय ही नहीं होता था। सुधीर की तनख्वाह इतनी ज्यादा नहीं थी वह कंपनी में अकाउंटेंट के पद पर जरूर थे लेकिन उनकी तनख्वाह इतनी ज्यादा नहीं थी।

हम लोग एक छोटे से शहर के रहने वाले हैं इसलिए हमारे खर्चे भी उतने नहीं है परंतु उसके बावजूद भी जीवन में कुछ और जरूरते भी होती हैं जिन्हें की हमें पूरा करना होता है। मैंने सुधीर से अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाने की बात की थी लेकिन वह अभी भी सरकारी स्कूल में पढ़ रहे थे। मैंने सुधीर से कई बार कहा कि हमें उन्हें किसी इंग्लिश मीडियम स्कूल में डालना चाहिए जिससे कि वह लोग अच्छे से पढ़ाई कर सकें। सुधीर मुझसे हमेशा कहते कि इंग्लिश मीडियम में कहां पढ़ाई होती है तुम देखती तो हो की वहां पर सिर्फ बेमतलब की टोकरीले बाजी होती रहती है। मैं सुधीर की बातों से बिल्कुल सहमत नहीं रहती थी पहले ऐसा नहीं था लेकिन कुछ समय से सुधीर के अंदर बहुत ज्यादा चिड़चिड़ापन आने लगा था वह बिल्कुल भी अच्छे से बात नहीं किया करते। मैंने सुधीर को कई बार समझाने की कोशिश की कि तुम्हारे अंदर अब बहुत चिड़चिड़ापन आ चुका है तुम्हें मुझसे ऐसे बात नहीं करनी चाहिए तो सुधीर मुझे कहते कि यदि तुम्हें मुझसे कुछ परेशानी है तो तुम अपने मायके चली जाओ। मैं सुधीर से कहती थी की मैं अपने मायके जाकर क्या करूंगी मैंने तुम्हारे साथ शादी करने का फैसला किया था और उस बात से मेरे माता-पिता भी हमेशा मुझे कोसते रहते हैं। सुधीर और मेरे बीच उस दिन कुछ ज्यादा ही झगड़ा बढ़ गया मैं गुस्से में थी और मैं अपने बच्चों को लेकर अपने मायके चली गई मेरी मां मुझे कहने लगी बेटा क्या तुम्हारे और सुधीर के बीच झगडा हुआ हैं। मेरी मां मुझे कहने लगी बेटा हमने तुम्हें कितने लाड प्यार से पाला है लेकिन सुधीर तुम्हारा बिल्कुल भी ख्याल नहीं रखता तुम्हारे चेहरे का रंग भी उतर चुका है और तुम्हारे आंखों के नीचे काले धब्बे बता रहे हैं कि तुम कितनी ज्यादा परेशान रहने लगी हो। मेरी मां मेरा चेहरा देखकर समझ चुकी थी कि मैं अपने जीवन में कितनी ज्यादा दुखी हूं मेरी मां मुझसे कहने लगी कि आज के बाद तुम सुधीर से कोई संबंध नहीं रखोगी और तुम अब हमारे साथ ही रहोगी।

 मेरी मां मुझे लेकर बहुत चिंतित थी और उनकी चिंता बिल्कुल जायज थी क्योंकि मैं उनकी इकलौती बेटी हूं और उन्होंने मुझे इतने प्यार से पाला पोषा है उसके बाद सुधीर ने मुझे कभी भी वह प्यार नहीं दिया। मैं कुछ दिनों तक अपने मम्मी पापा के पास रहने वाली थी और मुझे अच्छा भी लग रहा था काफी समय बाद मैं अपने लंबे अंतराल के बाद अपने माता पिता के पास आई थी। मुझे लग रहा था कि मैं कितनी खुश हूं मेरे माता-पिता मेरा बहुत ध्यान रखते थे और उसी बीच सुधीर का भी मुझे फोन आया वह मुझसे बहुत गुस्सा थे और कहने लगे तुम बिना बताए ही अपने मायके चली गई। मैंने सुधीर से कहा देखो सुधीर तुम मुझसे बिल्कुल भी प्यार नहीं करते हो और मैं तुम्हारे भरोसे कब तक बैठी रहूं सुधीर का भी वही व्यवहार था वह बिल्कुल भी झुकने को तैयार नहीं थे। वह मुझसे कहने लगे तुम्हारी ही गलती है तुम ही मुझसे हमेशा झगड़ती रहती हो मैंने सुधीर से कहा मैं तुमसे कब झगड़ती हूं तुम भी बेवजह बात को आगे ना बढ़ाओ और मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं है कि हम दोनों का रिश्ता आगे चल पाएगा। मैंने फोन काट दिया और उसके बाद सुधीर मुझे कई बार फोन करते रहे लेकिन मैंने सुधीर का फोन नहीं उठाया आखिरकार सुधीर मुझसे मिलने के लिए मेरे मम्मी पापा के घर आ गए।

मेरे पापा बहुत ज्यादा गुस्सा में थे मेरे पापा ने उस दिन सुधीर को बहुत कुछ भला बुरा कहा वह कहने लगे सुधीर हमने तुमसे अपनी बेटी की शादी कराई थी हमें लगता था कि तुम उसकी खुशियों का ध्यान रखोगे लेकिन तुम उसकी स्थिति देखो वह कैसी हो गई है। मेरे पिता जी का गुस्सा सातवें आसमान पर था और वह इतने ज्यादा गुस्से में थे कि उन्होंने सुधीर को घर से जाने तक के लिए कह दिया सुधीर भी गुस्से में घर से चले गए और उसके बाद उन्होंने मुझे काफी समय तक फोन नहीं किया। मैंने उनसे कोई बात नहीं की लेकिन हम दोनों के रिश्ते की वजह से मेरे बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ने लगा था मैं चाहती थी कि वह किसी अच्छे स्कूल में पढ़े। मेरे पिताजी ने उनका दाखिला हमारे घर के पास के स्कूल में करवा दिया और जब उन्होंने मेरे बच्चों का दाखिला वहां करवाया तो मुझे इस बात की खुशी थी की वह अच्छे स्कूल में पढ़ने लगे हैं। सुधीर से मेरा कोई संबंध नहीं था मुझे तीन महीने हो चुके थे और तीन महीने से मैं घर पर ही थी। घर पर रहने के दौरान मेरी मुलाकात आशीष के साथ हुई आशीष हमारी कॉलोनी में इलेक्ट्रिक का काम करता था। एक दिन हमारे घर की बिजली खराब हुई थी मेरी मां ने कहा तुम जाकर आशीष को बुला लो। मैंने आशीष को बुला लिया आशीष घर की बिजली देखने लगा मेरी मां कहने लगी बेटा मैं जाकर सब्जी ले आती हूं। मेरी मां सब्जी लेने के लिए चली काफी समय से मैंने किसी के साथ शारीरिक संबंध भी नहीं बनाए थे और आशीष की कद काठी और उसका शरीर देखकर में पूरी तरीके से उत्तेजित हो जाती। आशीष ने भी मेरे बदन को सहलाना शुरू कर दिया क्योंकि मैंने हीं आशीष को अपनी ओर आने की इजाजत दी थी इससे आशीष मेरी और आ चुका था और वह बहुत खुश था।

 मैं भी बहुत ज्यादा खुश थी आखिरकार आशीष ने मेरे बदन को चाटना शुरु किया तो मेरी उत्तेजना पूरे चरम सीमा पर पहुंच चुकी थी मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित हो चुकी थी। मेरी योनि से गीलापन बाहर की तरफ को निकल रहा था मेरी योनि अब इस कदर गिली हो चुकी थी। मैंने आशीष से कहा तुम अपने मोटे से 9 इंच के लंड को मेरी चूत में डाल दो आशीष ने अपने लंड को मेरी योनि के अंदर डालना शुरू किया। वह कहने लगा तुम्हारी चूत तो बड़ी टाइट है मैंने उससे कहा काफी समय से मैंने अपने पति के साथ संभोग नहीं किया है इसीलिए तो तुम्हें टाइट पन का आभास हो रहा होगा। आशीष के हाथ में तो जैसे कोई मजेदार चीज लग गई थी वह मुझे बड़ी तेज गति से चोद रहा था। आशीष ने मेरी चूत के मजे लिए मै उस समय उसकी दीवानी हो गई आशीष के साथ में सेक्स करने के लिए तैयार रहने लगी थी। आशीष ना जाने कहां कहां जाया करता था वह आस पड़ोस की महिलाओं को बहुत खुश कर देता था आशीष मेरे आस-पास भी नहीं आना चाहता था।

 मैंने उसे पैसे का लालच देना शुरू किया और एक दिन वह मेरे पास आय जब वह आया तो मैंने उसे कुछ पैसे दिया और कहा आज मेरी खुजली को शांत कर दो जानेमन। मैंने उसकी छाती पर हाथ रखा तो वह भी मेरे लिए तड़पने लगा उसने मुझे घोड़ी बनाकर बड़ी तेज गति से धक्के देने शुरू किए और काफी देर तक वह मेरे साथ संभोग करता रहा। जैसे ही उसने अपने लंड पर तेल लगाते हुए मेरी मोटी गांड के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवाया तो मैं चिल्ला उठी। मेरे मुंह से बड़ी तेज चख निकली और गांड के रास्ते खून भी बाहर निकलने लगा था। मैं उसे कहने लगी और तेजी से करो ना तो वह भी अपनी पूरी ताकत मेरी गांड के ऊपर झोक दिया करता। जिस तरीके से वह मुझे धक्के मार रहा था उससे मै पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी। मैं अपने चूतडो को आशीष के लंड से टकराने लगी जिससे कि आशीष भी पूरी तरीके से जोश में आ जाता और वह मुझे बड़ी देर तक धक्के मारता रहा। आशीष का वीर्य पतन मेरी गांड के अंदर हुआ तो मैंने उसे कहा आज के बाद तुम मेरे इच्छा पूरी करने आते रहोगे और मैं तुम्हे उसके बदले पैसे दूंगी। आशीष भी पैसे का लालची निकला वह मेरे पास सिर्फ पैसे के लिए आता था।

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