एक लंड और तीन चूत

hindi sex kahani हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम राज है, मेरी उम्र 32 साल और लम्बाई करीब 6 फिट है। में एक शादीशुदा आदमी हूँ। दोस्तों यह बात जिसको आज में आप सभी चाहने वालों के लिए लिखकर तैयार कर रहा हूँ। यह करीब एक महीने पुरानी बात है। दोस्तों हमारे पड़ोस में एक भाभी, उनके पति और उनके दो बच्चे रहते है, मेरी वो भाभी इतनी गोरी सुंदर है कि जो भी उनको एक बार देखता है बस वो चकित होकर देखता ही रह जाता है और उनके बूब्स का तो कोई जवाब ही नहीं है। उनके बूब्स का आकार करीब 38-28-38 है। मेरी अपनी उस भाभी से हमेशा बातें होती रहती है और हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश रहते थे और इन्ही गर्मियों की छुट्टियों में मेरी पत्नी उसकी माँ के घर गई हुई थी और में एक दिन अपनी उसी भाभी के घर के सामने से गुजर रहा था। फिर उस समय भाभी अपने दरवाजे पर खड़ी हुई थी और वो मुझसे पूछने लगी कि तुम कहाँ जा रहे हो राज? मैंने उनको कह दिया कि में बाजार किसी काम से जा रहा हूँ। तो वो मुझसे कहने लगी कि मुझे भी बाजार जाना है, तब मैंने झट से उनको कहा तो आप भी चलो, वो तुरंत मेरे साथ मेरी गाड़ी पर बैठकर बाजार जाने लगी। फिर कुछ दूर चलने पर मैंने महसूस किया कि में जैसे ही अपनी गाड़ी के ब्रेक लगा रहा था, उस समय भाभी के सेक्सी बूब्स भी मेरी कमर से छू रहे थे। फिर मुझे यह अहसास बहुत अच्छा लग रहा था जिसकी वजह से में मन ही मन बड़ा खुश था और अब मैंने जानबूझ कर और भी ब्रेक लगाने शुरू कर दिए, जिसकी वजह से भाभी मुझसे और भी ज़्यादा चिपकी जा रही थी।
फिर मैंने उसी समय थोड़ी सी हिम्मत करके मजाक में भाभी से पूछ ही लिया क्यों जनाब आपके क्या इरादे है? तो वो मुस्कुराते हुए कहने लगी कि हमारे इरादे तो एकदम नेक है, लेकिन आप ही हमें बताए कि आपके इरादे कैसे है। अब मैंने भी हंसते हुए कह दिया कि इरादे तो हमारे भी नेक ही है वरना आज आप हमारे पीछे नहीं कहीं दूसरी जगह पर होते। फिर वो हंसकर मुझसे कहने लगी आप बहुत शरारती हो और यह बात कहकर उन्होंने मेरी जांघ को अपने हाथ से सहला दिया। दोस्तों यह सब होने के बाद मेरी हिम्मत अब पहले से ज्यादा बढ़ गई और उस दिन से ही हम दोनों के बीच बातचीत, हंसी, मजाक कुछ ज्यादा ही होना शुरू हो गया। अब वो मुझसे बहुत मजाक करती और में बातों ही बातों में दो मतलब वाली बातें कह देता, जिसका मतलब तुरंत समझकर वो शरमाने लगती और कई बार में उनको मजाक में पीछे से जाकर अपनी बाहों में भी भर चुका था। तब मुझे उनके बड़े आकार के एकदम मुलायम बूब्स का मज़ा आ जाता, लेकिन वो मुझसे कभी कुछ नहीं कहती इसलिए मेरी हिम्मत बढ़ने ही लगी थी।
दोस्तों अब तो मुझे बस एक अच्छे मौका इंतजार था, जिसका फायदा उठाकर में उनकी जमकर चुदाई करने के विचार अपने मन में बना चुका था और फिर दोस्तों मेरी किस्मत ने मेरा साथ देते हुए वो मौका भी मेरे यह बात सोचने के बस तीन दिन बाद ही मुझे दे दिया। दोस्तों में बताना ही भूल गया कि मेरी भाभी के पति को उनके ऑफिस के काम की वजह से अक्सर बाहर जाना पड़ता था और उस दिन भी मेरी हॉट सेक्सी भाभी के पति बाहर गये। फिर भाभी ने मुझसे फोन करके कहा कि तुम आज रात को करीब आठ बजे तक मेरे घर आ जाना, में तुम्हारे आने के लिए अपने घर का दरवाजा खुला ही छोड़ दूँगी। फिर में यह बात सुनकर मन ही मन बहुत खुश होकर उनकी चुदाई की हसरत को अपने मन में लेकर एकदम ठीक समय अपनी भाभी के घर पहुँच गया। फिर मैंने देखा कि उस समय भाभी भी मेरे ही इंतजार में बैठी हुई थी और उस समय उन्होंने बहुत ही सेक्सी गाउन पहना हुआ था, जिसमें वो बहुत बड़ी ही आकर्षक नजर आ रही थी और उनको देखते ही मेरा मन ललचाने लगा।
फिर मेरे वहां पर पहुंचते ही वो झट से मुझसे लिपट गई और उनके दोनों हाथ मेरी कमर से लिपटकर मुझे अपनी बाहों में जकड़े हुए थे, जिसकी वजह से मेरी छाती से उनके बड़े आकार के एकदम मुलायम बूब्स दबकर मेरे अंदर की आग को बढ़ाने का काम कर रहे थे। फिर मैंने भी जोश में आकर तुरंत ही उन्हे अपनी गोद में उठा लिया और फिर में उनको बेड पर ले गया जहाँ पहुंचकर मैंने उनको लेटा दिया। अब मैंने उन्हे उनके पैरों की तरफ से चूमते हुए प्यार करना शुरू किया और साथ ही में उनके बूब्स को भी सहलाने दबाने लगा था, जिसकी वजह से भाभी जोश में आकर मदहोश होने लगी थी। फिर में उनका वो जोश मस्ती देखकर बिना देर किए धीरे धीरे अपने एक हाथ से उनके गाउन को ऊपर उठा रहा था और उनके पैरों को चूम रहा था, में अब उनकी चिकनी जाँघो को भी चूम रहा था।
तभी मुझे उनकी काले रंग की पेंटी नजर आने लगी थी और मैंने बिना देर किए पेंटी को भी तुरंत उतार दिया, उनकी चूत पर अपनी गरम गरम सांसे छोड़ी और फिर हल्का सा काट भी लिया। फिर भाभी दर्द की वजह से ऊहह आउच करने लगी और अब मैंने उनके गोरे, मुलायम, पेट पर भी अपनी गरम गरम साँसे छोड़नी शुरू की और उसके बाद पेट, नाभि पर किस किया, अपनी जीभ को नाभि के अंदर डालकर घुमाया। दोस्तों मेरे यह सब करने की वजह से अब तो भाभी बिल्कुल पागल हुई जा रही थी और वो मुझसे कहने लगी कि राज प्लीज जल्दी करो आह्ह्ह ऊफ्फ्फ मुझे अब बिल्कुल भी नहीं रहा जाता, लेकिन में तो अभी दोस्तों उसके पूरे जिस्म का मज़ा अच्छे से लेना चाहता था, इसलिए मैंने उसके गाउन को थोड़ा और ऊपर उठा दिया। अब मुझे उसकी काले रंग की ब्रा साफ नजर आ रही थी जो उसके गोरे बदन पर बड़ी जंच रही थी। मैंने ब्रा के ऊपर से ही हल्के से उसके दोनों बूब्स के निप्पल को काटा तो भाभी दर्द की वजह से ऊऊईइइ माँ मर गई प्लीज अब मुझसे नहीं रहा जाता आह्ह्ह प्लीज अब तुम जल्दी से मेरा कुछ करो, वरना में तड़प तड़पकर ही मर जाउंगी और फिर मैंने उनसे कहा कि मेरी जान तुम्हे इतनी भी क्या जल्दी है, अभी तो हमारे पास पूरी रात पड़ी है। अब यह बात कहते हुए मैंने उनकी गर्दन पर किस किया उसके बाद कानों को चूमने लगा और अब मैंने उनके गुलाबी, रसभरे, होंठो को चूसना शुरू किया और कुछ देर बाद उनके गालों को किस किया, फिर पलको को चूमा जिसकी वजह से वो जोश में आकर अपनी सारी हदे पार कर गई।
अब मेरी वो भाभी मेरे सामने सिर्फ ब्रा, पेंटी में लेटी हुई थी और मैंने उन्हे अब उल्टा लेटाकर गर्दन की तरफ से चूमते हुए में पैरों तक आ गया और मेरे यह सब करने की वजह से भाभी इतनी गरम हो चुकी थी कि वो मुझसे अब कह रही थी राज प्लीज अब तो तुम मुझे चोद दो, क्यों तुम मेरी परीक्षा ले रहे हो प्लीज मुझे और पागल मत करो। मेरे लिए यह सब सहना बड़ा मुश्किल होता जा रहा है। फिर मैंने उन्हे एकदम सीधा लेटाकर उसकी पेंटी को उतार दिया और अब अपना पसंदीदा काम शुरू किया, मैंने धीरे धीरे उनकी चूत पर अपनी जीभ को घुमाना शुरू किया और घुमाते घुमाते अचानक से मैंने अपनी जीभ को उनकी चूत के अंदर डाल दिया। फिर भाभी ने जोश में आकर झट से मेरा सर पकड़ लिया और बोली राज मेरा हो जाएगा, प्लीज तुम एक बार अपना लंड तो डाल दो तुम मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हो, क्या मुझे तड़पता हुआ देखकर तुम्हे मज़ा आ रहा है? अब मैंने हंसते हुए उससे कहा कि जान कोई बात नहीं है कर लो, लंड को में दूसरी बार में डाल दूँगा, अब मेरे दोनों हाथ उनके निप्पल पर और मेरी पूरी जीभ उनकी चूत में थी। में उनकी चूत के दाने को अपनी जीभ से सहलाते हुए चूस रहा था और वो अपने कूल्हों को हर बार ऊपर उठाकर मेरे मुहं को अपनी चूत पर दबा रही थी। फिर कुछ देर ही चले इस काम के बाद भाभी ने एकदम से होश में आकर अपनी लड़खड़ाती हुई आवाज में वो बोली आह्ह्ह्ह ऊफ्फ्फ में राज में गई और उसी के साथ उनका वो मीठा जूस मेरे मुहं पर आ गया। फिर मैंने भाभी का सारा जूस पी लिया उनकी चूत को अपनी जीभ से चाट चाटकर साफ कर दिया और अब भाभी बिल्कुल ठंडी हो चुकी थी और उनका वो जोश पानी के साथ ही ठंडा होता चला गया।
अब वो मेरे इस काम से खुश होकर मुझसे बोली कि धन्यवाद राज में दो बच्चो की माँ बन चुकी हूँ, लेकिन मुझे इतना मज़ा और यह सुख आज से पहले कभी नहीं आया, तुम्हे शायद सब कुछ बहुत अच्छी तरह से करना आता है और तुम्हारी पत्नी तुम्हारे साथ बड़ी खुश रहती होगी, क्योंकि तुम बहुत अनुभवी, गोरे, सुंदर होने के साथ किसी भी स्त्री के मन की बात को तुरंत सुनकर ठीक तरह से समझकर उसको संतुष्ट करने की कला से परिपूर्ण हो, तुम्हे पहली बार देखकर ही में समझ चुकी थी कि तुम्ही में वो जोश होगा जो किसी भी प्यासी चूत को उसकी चुदाई करके उसको पूरी तरह से संतुष्ट कर दे और तुम्हारे लंड में वो दम है जो मेरी इस चूत को चोदकर इसकी प्यास को जरुर बुझा देगा। फिर मैंने उनसे कहा भाभी क्या अब आपको मेरा भी लंड शांत करना है? वो बोली कि हाँ में उसके लिए तैयार हूँ, अब तुम मुझे तुम्हारे इस लंड का वो जोश, दम दिखाओ जिसके लिए में इतनी तरस रही हूँ चलो अब शुरू हो जाओ और मुझसे यह बात कहकर उन्होंने झट से मेरा अंडरवियर उतार दिया और वो मेरे पूरे जिस्म पर पागलों की तरह चूमने लगी। फिर जब में पूरी तरह से गरम हो गया तो भाभी ने मेरा पूरा लंड एकदम से अपने मुहं में ले लिया और भाभी को मैंने इतना संतुष्ट कर दिया था कि वो खुश होकर पूरे मन से मेरा लंड अपने गले तक लेकर किसी अनुभवी रंडी की तरह चूस रही थी।

दोस्तों उनके यह सब करने की वजह से में भी स्वर्ग की सैर कर रहा था, क्योंकि मुझे भी इससे पहले चुदाई का इतना मज़ा पहले कभी नहीं मिला था, करीब बीस मिनट के बाद में भी झड़ गया और मैंने अपना पूरा वीर्य भाभी के मुहं में निकाल दिया। फिर भाभी मेरे वीर्य की एक एक बूँद को बड़े चाव से पी गई और मेरे लंड को किसी भूखी बिल्ली की तरह चाटकर साफ कर दिया और इसके थोड़ी देर बाद हम दोनों एक बार फिर से उसी काम के लिए शुरू हो गये और इस बार मैंने भाभी को कुछ देर बेड पर लेटाकर और उसके बाद घोड़ी बनाकर उनके ऊपर चड़कर और कुछ देर बाद टेबल पर बैठकर तरह तरह से हर बार एक अलग तरह से चुदाई के मज़े दिए। दोस्तों इस बार मैंने करीब तीस मिनट तक उनको सभी तरह से चोदा तब जाकर में झड़ गया और तब तक मेरी भाभी दो बार अपनी चूत का पानी छोड़ चुकी थी, भाभी तो मेरा लंड पाकर निहाल हो चुकी थी और वो मुझसे कह रही थी, अब जब भी मौका लगे तुम मुझे ऐसे ही चोदते रहना मेरे जानू। दोस्तों अब तक सुबह के 5:30 बज चुके थे, इसलिए में जल्दी वापस अपने घर आ गया और उसके बाद में सो गया। में उठने के बाद पूरा उनके साथ पूरी रात हुई उस चुदाई के बारे में सोचकर खुश होता रहा।
दोस्तों करीब पांच दिन बाद भाभी का मेरे पास फोन आ गया और वो मुझसे कहने लगी कि आज मेरे पति बाहर जा रहे है इसलिए में घर में पूरा दिन अकेली ही रहूंगी, तुम मेरे घर आ जाना। फिर वो मुझसे कहने लगी कि जो सब कुछ हम दोनों ने उस दिन किया था वो सब मैंने अपनी एक करीबी दोस्त को बता दिया है, सारी बातें सुनकर वो बहुत खुश हुई और अब वो भी आपके साथ वो सब कुछ करना चाहती है जो मैंने आपके साथ किया है क्योंकि उसकी भी चुदाई उसके पति से ठीक तरह नहीं होती वो भी मेरी तरह प्यासी है, मुझे उम्मीद है कि तुम उसको भी वैसे ही मज़े देकर खुश करोगे जैसे मुझे किया है। दोस्तों मुझे यह सभी बातें सुनकर एक झटका लगा और में एकदम चकित था। मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि वो ऐसा भी कभी कुछ कर सकती है, लेकिन मैंने फिर ठंडे दिमाग से सोचा कि इन सभी से मुझे क्या फर्क पड़ता है? मुझे तो मज़े आ गये एक की जगह में दो की चुदाई के मज़े ले सकता हूँ। फिर मैंने उनको कहा कि आप उसको भी आज रात यहीं पर ही बुला लो, में उनका भी काम कर दूंगा तो भाभी कहने लगी कि उसकी एक समस्या है, उसके साथ उसकी भांजी भी रहती है और वो यहाँ पर रहकर अपनी पढ़ाई कर रही है इसलिए वो रात के समय उसको अकेला घर में छोड़कर नहीं आ सकती। अब मैंने झट से कह दिया कि तो क्या हुआ? आप उसको भी बुला लो, वो दूसरे रूम में बच्चो के साथ सो जाएगी और हम दूसरे रूम में यह सब कुछ करेंगे और फिर भाभी मेरी बात को सुनकर बोली हाँ ठीक है में ऐसा ही करती हूँ।
फिर भाभी ने उस दिन उन्हे भी अपने घर पर बुला लिया और में रात को करीब दस बजे उनके घर पहुंच गया, तब तक बच्चे और भाभी की दोस्त की भांजी भी सो चुकी थी। फिर भाभी ने मेरा अपनी दोस्त से परिचय करवाया, जिसके बाद हम तीनों ने कुछ देर बातें हंसी मजाक करने के बाद जाकर बेड पर लेट गये और धीरे धीरे अपना वो काम शुरू किया। दोस्तों अब हम तीनो बिल्कुल हो नंगे थे, भाभी मेरा लंड सहला रही थी और साथ ही उसको अपने मुहं में लेकर चूसकर खड़ा करने का काम कर रही थी और में उनकी दोस्त जिसका नाम रीना था, उसके बूब्स को सहलाते हुए हल्के से दबाकर उनके साथ खेल रहा था और वो मेरे सर में अपने हाथों की उँगलियों को घुमाते हुए जोश में आकर आह्ह्ह्ह ऊफ्फ्फ सिसकियाँ ले रही थी। उस समय हम तीनों जोश मस्ती में आकर दूसरी दुनियां में जाकर खुश थे, आज हम तीनों ने एक दूसरे को संतुष्ट करने की बात अपने मन में ठान ली थी और उस समय कमरे की लाइट जली हुई थी। फिर कुछ देर बाद अचानक रूम का दरवाजा खुला और हमने देखा तो रीना की भांजी भी कमरे के अंदर आ गई और अब हम सभी उसको अपने सामने देखकर बिल्कुल हैरान, चकित रह गए। दोस्तों यह हमारी ही एक सबसे बड़ी गलती की वजह से हुआ था हम जल्दबाजी में दरवाजा बंद करना ही भूल गये थे, रीना की वो भांजी जिसका नाम नेहा था वो 12th में पढ़ती है और वो अपनी पूरी जवानी में थी। उसकी उम्र अब शादी करने लायक थी और उसका गोरा, सेक्सी, बदन, गोल बड़ी आखें, एकदम उठे हुए बूब्स जो बिल्कुल गोलमटोल होने के साथ साथ उभरे हुए भी थे, वो ऊपर से लेकर नीचे तक हम सभी को पूरा नंगा यह काम करते हुए देख जोश में भर चुकी थी, जिसकी वजह से शायद उसकी चूत गीली होकर मेरे लंड को लेने के लिए तैयार थी, इसलिए वो हम सभी पर नाराज होने की जगह अंदर आकर बोली क्यों आपने मुझे तो उन छोटे बच्चो के साथ सुला दिया और आप लोग यहाँ पर आकर यह सब मज़े ले रहे हो। दोस्तों उसके मुहं से यह बात सुनकर हम सभी बिल्कुल हैरान हो गये क्योंकि वो यह सभी बातें हमारी उम्मीद से एकदम अलग हटकर बोल रही थी।
अब वो हंसते हुए बोली मैंने बहुत बार सेक्सी फिल्म देखी है, इसलिए मेरा भी मन अब सेक्स करने के लिए करता है, प्लीज मुझे भी आप अपने इस खेल का हिस्सा बनाकर मुझे भी यह सब मज़े करने दो, प्लीज एक बार मेरी भी इस इच्छा को आज आप पूरा करने दो। दोस्तों हम तीनों ने अपनी इज़्ज़त बचाने की खातिर उसको भी हमारे उस खेल में शामिल कर लिया और उसने बिना हमारे कहे ही अपने कपड़े उतारकर वो तुरंत ही बेड पर आ गई और अब वो आगे आकर मेरा लंड अपने हाथों में लेकर सहलाने के बाद मुहं में लेकर चूसना शुरू कर दिया और वो इस तरह से यह काम कर रही थी कि जैसे वो इस खेल की बहुत बड़ी खिलाड़ी हो, उसके अंदर बिल्कुल भी लाज शरम नहीं थी। वो तो आते ही पूरी ईमानदारी से अपने काम को कर रही थी। अब हम चारों ही बिना किसी शरम के इस खेल का मज़ा लेने लगे थे और हम तीनों ही तीस साल के करीब थे और नेहा सिर्फ अभी 18 साल की थी, लेकिन वो किसी से कम नहीं थी। हर एक स्टाइल में वो मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी। दोस्तों मुझे तो लगने लगा था कि नेहा पहले से भी अपनी चुदाई के मज़े ले चुकी थी और कुछ देर बाद भाभी, रीना मुझसे कहने लगी कि राज तुम नेहा से ही इस काम की शुरुआत करो और अब तक हम सभी चूमना, चाटना, सहलाना तो बहुत कर चुके थे, जिसकी वजह से नेहा बिल्कुल गरम हो चुकी थी। अब भाभी और रीना ने आगे बढ़कर नेहा के एक एक बूब्स को अपने मुहं में ले लिया, वो चूसने लगी और मैंने अपने लंड का मुहं नेहा की चूत पर रख दिया और फिर हल्का सा दबाव बनाकर चूत के अंदर अपने लंड को डालना शुरू किया।
फिर नेहा मेरे मोटे लंबे लंड के उस धक्के से हुए दर्द की वजह से चीख पड़ी और में वहीं पर वैसे ही रुक गया, में उसके बदन को सहलाने लगा था। तभी नेहा ने आईईइ ऊफ्फ्फ्फ़ करते हुए कहा जानू मुझे दर्द तो एक बार जरुर होगा इसलिए तुम मेरे दर्द की तरफ बिल्कुल भी ध्यान ना देते हुए बस अपना काम करो, तुम जल्दी से पूरा मेरे अंदर डाल दो। अब मुझे भी उसके मुहं से यह बात सुनकर जोश आ गया और इसलिए मैंने अपने एक ही जोरदार झटके में अपना पूरा लंड उसकी चूत की गहराइयों में डाल दिया। फिर नेहा दर्द से तड़पते हुए कहने लगी आह्ह्ह्ह ऊउईईईइ मम्मी में मर गई और वो लंड के अंदर जाते ही उछलने लगी। वो बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही थी और फिर मैंने उसकी चूत की तरफ देखा वो चादर जो नीचे बिछी हुई थी, उस पर चूत से निकला खून मुझे नजर आने लगा। अब भाभी उससे कहने लगी कि नेहा मेरी जान तुम्हे मज़ा लेना है, तो दर्द भी तो सहना पड़ेगा, देखो अभी कुछ देर बाद तुम मज़े मस्ती की दूसरी दुनियां में चली जाओगी, तुम्हे इतना मज़ा अब आगे आने वाला है। फिर में थोड़ी देर तक ऐसे ही उसके ऊपर पड़ा रहा और कुछ देर बाद जब उसका दर्द कम हुआ था। तब मैंने धीरे, धीरे अपने लंड को अंदर, बाहर करना शुरू किया, जिसकी वजह से अब नेहा को मज़ा आने लगा था और वो भी नीचे से धक्के लगाने लगी। फिर वो करीब पांच सात मिनट में ही झड़ गई, लेकिन मेरा जोश अब भी वैसा ही था और अब मैंने अपने लंड को नेहा की चूत से बाहर निकालकर तुरंत ही रीना की चूत में डालकर बड़ी तेज गति से धक्के लगाकर चुदाई करना शुरू किया।
दोस्तों रीना को मैंने बहुत सारे अलग अलग तरीको से चोदा और जब रीना भी झड़ गई तो उसके बाद मैंने अपनी भाभी का नंबर लगा दिया। में उनको चोदने लगा था था और इतने में ही नेहा एक बार फिर से गरम हो गई और मेरे लंड के साथ साथ नेहा अपनी एक उंगली को भी भाभी की चूत के अंदर डालकर अंदर, बाहर करने लगी थी और वो सिसकियाँ ले रही थी। फिर इतने में भाभी भी झड़ गई और में यह काम करके थक चुका था, इसलिए में बेड पर एकदम सीधा लेट गया और अब नेहा मेरे ऊपर चड़ गई और उसने लंड को अपनी चूत में डालना शुरू किया, वो मेरा पूरा लंड अपनी चूत में लेकर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगाने लगी। फिर में नीचे लेटा हुआ मज़े ले रहा था और उसका जोश देखकर में बड़ा चकित था, क्योंकि वो पतली दुबली थी, इसलिए इतनी उछलकूद कर रही थी। अब मेरा भी बस काम होने ही वाला था, इसलिए करीब पांच सात मिनट में ही मैंने अपना गरम गरम वीर्य नेहा की छोटी सी कुंवारी चूत में छोड़ दिया, लेकिन तब भी वो उछलकूद कर रही थी और इस तरह से पूरी रात हम सभी ने बड़े मज़े लिए, भाभी तो मेरी देवानी पहले से ही थी। अब तो रीना और नेहा भी मेरी देवानी हो चुकी है और उस रात के बाद भी हम सभी ने दो बार ऐसा ही मस्त खेल खेलकर मज़े किए जिसकी वजह से हम सभी बहुत खुश थे। दोस्तों यह थी मेरी वो सच्ची चुदाई की घटना जिसको आज भी याद करके मेरा मन ख़ुशी से झूम उठता है। में वो उनके साथ चुदाई एक साथ तीन गोरी प्यासी चूत और एक के बाद एक की चुदाई अपने पूरे जीवन वो पल नहीं भुला सकता और मुझे उम्मीद है कि इस कहानी को पढ़ने वाले भी वैसा ही मज़ा महसूस कर रहे होंगे ।।
धन्यवाद

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